• Prosperity
  • 01-Nov
दो माँ और बच्चा

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच हालिया मनमुटाव के बाद धन वापसी आंदोलन और भी प्रासंगिक हो गया है।



दोस्तो, आप सबने वो कहानी तो सुनी होगी जिसमें दो औरतें एक बच्चे के लिए राजा के पास जाकर फरियाद करती हैं कि वो बच्चा उनका है। सच्चाई जानने के लिए राजा फैसला सुनाता है कि बच्चे को बीच में से काटकर दोनों औरतों में बांट दिया जाए। इससे असली मां की पहचान हो पाएगी क्योंकि एक मां अपने बच्चे को मारने का दर्द कभी बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।



…तो दोस्तो, इन दिनों अपने भारत देश में ऐसा ही कुछ हो रहा है, लेकिन यहां कहानी में एक पेंच है। हमारी कहानी में बच्चा है- भारतीय रिज़र्व बैंक का 10 लाख करोड़ रुपये का नकद भंडार ! क्या आप जानते हैं, 10 लाख करोड़ कितना होता है? 1 की संख्या के बाद 13 शून्य, जो हर भारतीय परिवार के हिस्से में 40,000 रुपये बैठता है। इस बच्चे के लिए दो ‘मांएं’ लड़ रही हैं। एक है- आरबीआई तो दूसरी है- केंद्र की बीजेपी सरकार। यह बच्चा यानी नकद भंडार इस समय एक मां आरबीआई के पास है और दूसरी मां यानी सरकार इस पर अपना दावा कर रही है।



…तो अब सवाल ये है कि ‘सरकार माँ’ इसे क्यों पाना चाहती है? अरे बाबा, यह चुनाव का साल है। कुछ मतदाताओं को खरीदना जो है, सही कहा ना? और ऐसा हर ‘सरकार माँ’ करती है। सभी राजनेता उन लोगों को पैसे देना चाहते हैं जिनके बारे में लगता है कि वो उन्हें वोट देंगे साथ ही ये नेता अपने लिए भी भारी-भरकम रकम बचा कर रखते हैं।



इन नेताओं ने एलआईसी मां, नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड मां, ओएनजीसी मां और ऐसी ही न जाने कितनी मांओं को पहले ही लूट लिया है। आखिरी बची हुई मां- आरबीआई है, अब इसे भी लूटने के लिए घमासान मचा हुआ है।



लेकिन, जैसा कि मैंने कहा है कि इस कहानी में एक पेंच है। वो ये है कि 10 लाख करोड़ वाला यह बच्चा उनमें से किसी का भी नहीं है। वे दोनो मां नहीं हैं, वे तो केवल आया हैं। असली मां है- भारतीय जनता ! … जी हां, यह हमारा बच्चा है ! यह हमारी संपत्ति है ! यह हर भारतीय परिवार का धन है !



इसलिए मूर्ख मत बनिए। भले ही यह लड़ाई आरबीआई और सरकार के बीच है, मगर आपके कोई कार्यवाही नहीं करने से इस लड़ाई में जो हारेगा, वो आप ही हैं। यह आपका बच्चा है जो कट रहा है…



लेकिन आप चाहें तो इन राजनीतिक दलों और उनके एजेंटों को आप अपनी संपत्ति, अपनी आवाज और समृद्धि से वंचित रखने से रोक सकते हैं। इसके लिए उन 70 करोड़ लोगों को जो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, उन्हें अगले चुनाव में एक साथ आना होगा और एकजुट होना होगा। इसलिए यही समय है कि इस बार उन्हें वोट करना चाहिए – स्वतंत्रता और समृद्धि के लिए।



दोस्तों, इसीलिए हमने ‘धन वापसी’ नामक एक आंदोलन शुरू किया है। राजनेताओं और नौकरशाहों के कब्जे से हमारी संपत्ति को आज़ाद कराने के लिए, जिससे हर भारतीय अमीर बन सकता है- और वो भी अभी और इसके लिए आपको पीढ़ियों तक इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।



इसलिए मैं कहता हूं कि आप सभी ‘धन वापसी’ मंच से जुड़ें। इसमें हमारे द्वारा चुने गए स्वतंत्र सांसदों वाली लोकसभा का चुनाव करने में हमारी सहायता करें- इसके लिए सर्वश्रेष्ठ 543 लोगों को देश भर में से चुना जाएगा। समृद्धि के लिए बनी यह सरकार हर भारतीय की संपत्ति वापस करने के लिए तब ‘धन वापसी’ विधेयक को पारित करे सकेगी और भारत को समृद्धि के मार्ग पर हमेशा आगे ही ले जाएगी।



इसलिए मैं कहता हूं कि ‘धन वापसी’ ही एकमात्र रास्ता है। ‘धन वापसी’ है आज़ादी ! ‘धन वापसी’ है समृद्धि !!



… और इसे आप ही कर सकते हैं। यदि आप नहीं तो दूसरा कौन? यदि अब नहीं, तो कब?



इसलिए जल्दी करिए, आज ही, अभी.. क्योंकि जब जागो, तभी सवेरा !!



भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच हालिया मनमुटाव के बाद धन वापसी आंदोलन और भी प्रासंगिक हो गया है। राजेश जैन सरकार और आरबीआई इस बीच इस लड़ाई का असली कारण बता रहे हैं और यह भी कि इस बीच वास्तविकता में भारतीय जनता को नुकसान पहुंच रहा है।



जय हिंद !



 


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