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  • 21-Sep
संसद में धन वापसी बिल हम कैसे पास करवा सकते है ?

2014 लोक सभा चुनाव में मोदी के चुनाव प्रचार के लिए मैंने 3 साल और अपना पैसा लगाकर 100 लोगों की एक टीम बनाई । क्यूं?



क्योंकि मुझे भरोसा था कि वह मोदी की अगुआई वाली बीजेपी सरकार ही है जो कांग्रेस के समृद्धि-विरोधी कार्यों को खत्म कर सकती है और हमारे भारत देश को समृद्धि के मार्ग पर ला सकती है। हमें एक नयी दिशा की ओर ले जा सकती है।



चार साल बीत चुके हैं मगर अब तक बीजेपी सरकार की पॉलिसी में कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई नहीं दिया। जबकि हमारे भारत को सबसे पहले गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी बड़ी और हमेशा वाली समस्याओं को खत्म करने की जरूरत है।



मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने भी वही पुरानी, टैक्स और खर्च बढ़ाने वाली विफल नीतियां अपनाईं।



शासक बदलते रहे पर देश नहीं बदला/परिणाम नहीं बदले।



सरकारी खर्चों और टैक्स में होने वाली बढ़ोतरी से हम सबको तकलीफ होती है। गरीबों को तो सबसे ज्यादा क्योंकि उनके पास कुछ होता ही नहीं है इन सबके लिए।अगर इससे हम सबको तकलीफ होती है चाहे वह अमीर हो या गरीब, तो वे ऐसा करते ही क्यों हैं?



अगर ये गरीब, अमीर सभी को नुक़सान पहुंचाती है तो वे ऐसा क्यूं करते हैं?



क्योंकि भारी-भरकम सरकार होने का मतलब है कि राजनेताओं और नौकरशाहों का अमीर हो जाना। वे हमारी गाढ़ी कमाई के पैसे हड़प कर दौलतमंद हो जाते हैं।



हम सभी फ्री में मिलने वाली चीज़ों की असल में बहुत बड़ी कीमत अदा करते हैं।



यह वही पुरानी कहानी है जो भारत में अंग्रेजों के राज से चल रही है- यही कि भारी-भरकम सरकार बनाओ और जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाते जाओ। सत्ता में बैठे लोगों की संपत्ति बढ़ती जाती है। हम गरीब होते जाते हैं, और हमारे पास आर्थिक आजादी भी नहीं होती।



सरकार न केवल हम जनता पर टैक्स का बोझ लाद देती है, बल्कि यह हमें हमारी सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल करने से मना करती है। जैसा कि हमारे ‘धन वापसी’ विकी (Wiki) में दिया गया है कि हर भारतीय परिवार का सार्वजनिक संपत्ति में 50 लाख से अधिक का दावा बैठता है। सार्वजनिक भूमि, सार्वजनिक क्षेत्र के निगम और उनकी संपत्तियों और खनिज-संपदाओं के रूप में हमारी सार्वजनिक संपत्ति बंद है।



इसका मतलब है कि हर परिवार को हर साल 1 लाख रुपया मिलना चाहिए। इस से हमें क्या फायदा होगा?



१ सैकड़ों बेकार और भ्रष्टाचार से भरी योजनाएं खत्म हो सकती हैं। इसका मतलब है कम टैक्स। जिससे हम सबको फायदा होगा। … और नुकसान होगा तो केवल भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों का



२- हर परिवार की आय हर साल १ lakh बाढ़ जाएगी। लोग ज़्यादा खरीदारी कर सकेंगे। और आर्थिक पैदावार बढ़ेगी जिस से लोगों को रोज़गार मिलेगा



इसीलिए मैं कहता हूं कि ‘धन वापसी’ है- हमारे भारत की समृद्धि का रास्ता… हर भारतीय को अमीर और आज़ाद बनाने का रास्ता !



जैसा कि हमने आपसे वादा किया था- …तो हमने ‘धन वापसी’ बिल तैयार कर दिया है। हमारा यह बिल आप सबके लिए हमारी वेबसाइट DhanVapasi.com पर उपलब्ध है। अपने वायदे के अनुसार हमने इस ‘धन वापसी’ बिल को पास करने के लिए अपने प्रधान मंत्री और संसद के हर सदस्य को भेज दिया है।



लेकिन यदि वो हमारी मांग को नजरंदाज करते हैं तो क्या होगा?



उसके बाद हम उनसे मुकाबला करते हैं। बाज़ार और राजनीति में कड़ी स्पर्धा सबसे बेहतर काम करते हैं।



वर्तमान सांसदों पर दबाव बनाने के लिए हमें स्पर्धा का माहौल बनाना होगा और अपने लिए एक नई पसंद लानी होगी।



जो हमसे हमारी और भी संपत्ति छीन लेंगे उन्हें वोट करने के बजाए हमे लोकसभा में उन लोगो को लाना होगा जो हमें हमारी संपत्ति लौटा सकें। क्या ये संभव है?



हांक्या ये संभव है? हां



राजनीतिक पार्टियां उतनी दमदार नहीं होती हैं जितनी कि हम कल्पना करते हैं। उदाहरण के लिए, बीजेपी के कोर सपोर्टर केवल 15 करोड़ होंगे। जो कि यह योग्य मतदाताओं का सिर्फ 15 प्रतिशत है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों को दूसरे 15 करोड़ वोटरों का सपोर्ट मिलता है।



इसका मतलब यह है कि- जिनको कोई पार्टी पसंद नहीं है- ऐसे लोग बहुमत में हैं। हममें से ऐसे लोग 70 करोड़ होंगे। प्रत्येक तीन योग्य मतदाताओं में से दो हमारे जैसे हैं। स्टैेडर्ड पार्टियों में से किसी को भी हम वोट देने वाले नहीं हैं।



हम जीत सकते हैं अगर हम एकजुट होकर उन लोगों को वोट दें जो हमें सपोर्ट करेंगे, न कि राजनीतिक पार्टियों को। हमें तीन चीजें करनी है:




  • १- यह सुनिश्चित करें कि वोट देने के लिए हम सभी रजिस्टर्ड हों

  • २- चुनाव के दिन पर वोट देने जरूर जाएं

  • ३- उन उम्मीदवारों पर हम अपने वोट बर्बाद न करें जिनके जीतने की कोई उम्मीद न हो।



अगर 70 करोड़ में से केवल आधे लोग ही ऐसा करते हैं, तो राजनीतिक पार्टियों को हराया जा सकता है।



‘धन वापसी’ जरूर संभव होगा और भारत को ‘नयी दिशा’ मिलेगी।



मैं आपके सभी सवालों का उत्तर दूंगा। हम अपने प्रत्याशी कैसे चुनेंगे? क्या ऐसा करने के लिए हमें एक नया राजनीतिक दल बनाना पड़ेगा? क्या हम इस आधार पर बहुमत में अपने सांसद चुन सकते हैं?



मै इन सभी सवालों के उत्तर अपने अगले वीडियो में दूंगा।



अगर आपको ये वीडियो पसंद आया तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ शेयर करें। हम साथ होंगे तभी धन वापसी संभव हो सकेगी।



धन वापासी बिल प्रधानमंत्री एवं संसद के सभी सदस्यों को भेज दिया गया है। यह बिल, सारांश और स्पष्टीकरण रिपोर्ट के साथ www.dhanvapasi.com पर उपलब्ध है। राजेश जैन समझा रहे हैं कि हम कैसे धन वापासी बिल पारित करवा सकते हैं और धन वापासी को सच बना सकते हैं।



जय हिन्द


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