• Prosperity
  • 01-Oct
धन वापसी को चाहिए नयी शक्ति

पुराना तरीका हमारे काम का नहीं है। यह केवल राजनीतिक वर्ग के काम का है। हमें नयी सत्ता से पुरानी सत्ता को बदलने की जरूरत है।



जैसा कि आप जानते हैं; पिछले कुछ हफ्तों से हम ‘धन वापसी’ के बारे में बात कर रहे हैं। हर परिवार को हर साल एक लाख रुपये लौटाए जाने चाहिए। यह न केवल नैतिक रूप से उचित है बल्कि आर्थिक रूप से भी सही है।



इस तरह हम- गरीबी, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसी हमेशा वाली तीनों समस्याओं को हल कर सकते हैं।



आज हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि ‘धन वापसी’ को कैसे साकार करें। क्या आप जानते हैं कि ‘धन वापसी’ में सबसे बड़ी रुकावट क्या है? ‘धन वापसी’ में सबसे बड़ी रुकावट है- हमारा राजनैतिक वर्ग!



उन्होंने हमारी संपत्ति पर कर रखा है। हमने उन्हें अपनी संपत्ति ले लेने दी। उन्हें ऐसा करने देने की गलती हमने देश के आज़ाद होने के बाद से ही की है– पहले 150 सालों तक अंग्रेजों ने ऐसा किया। फिर अंग्रेजों से सत्ता हासिल करने वाली राजनीतिक पार्टियों ने पिछले 70 सालों से हमारी संपत्ति पर कब्ज़ा कर रखा है।



लेकिन अच्छी खबर ये है कि हमारे पास सिस्टम को बदलने की ताकत है। हमारे पास ‘नयी दिशा’ की ताकत है।



पुराना तरीका हमारे काम का नहीं है। यह केवल राजनीतिक वर्ग के काम का है। भारत के राजनेता और उनके दोस्त अमीर बन गए जबकि हम भारतीय गरीब-के-गरीब ही रहे।



… तो सिस्टम अब कैसे काम करता है?



राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के हाथों में सारे पॉवर और नियंत्रण होते हैं। कौन हमारा प्रतिनिधित्व करेगा- ये भी वही तय करते हैं। इस बारे में हम जनता की कोई नहीं सुनता! हमें तो वोटिंग बूथ में जाकर केवल एक बटन दबाने की ही इजाज़त है। और ये राजनीतिक पार्टियां लोगों को रिश्वत देती हैं कि वे उनकी ही पार्टी को वोट दें। इसके लिए वे भारी मात्रा में धन खर्च करती हैं। हर चुनाव में बहुत-से लोग ऐसे ही घोटाले करते हैं और इसीलिए हमें बुरा शासन मिलता है।



अपने वोटों से हम उन्हें शासन करने का अधिकार देते हैं। हमारे वोटों से वे बेशुमार दौलत और बेहिसाब ताकत पा जाते हैं। भारत का लोकतंत्र केवल नाम से चलता है- हम ‘मालिकों’ के लिए मतदान करते हैं जो हमसे गुलामों की तरह काम करवाते हैं। और वे जो भी टैक्स लगाएं मजबूरन हम टैक्स भरें।



भारत में डेमोक्रेसी कम और कॉकिस्टोक्रेसी ज्यादा है- ये एक ऐसा सिस्टम है जिसमें अयोग्य और भ्रष्ट लोगों द्वारा सरकार चलाई जाती है। हम उन लोगों से कोई उम्मीद नहीं कर सकते जो सत्ता का गैरफायदा उठाते हैं। इसलिए वे ऐसा कोई बदलाव नहीं करेंगे जो उनके पॉवर को कम कर दे।



इस सिस्टम को बदलने के लिए हमें अपने पॉवर का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि यह अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी बन सके और मालिक-गुलाम के रिश्ते के बजाए बराबरी का रिश्ता बने। हमें अपने वोट का इस्तेमाल इस सिस्टम को बदलने के लिए करना होगा। हमें राजनीति के पुराने तरीके को बदलने की जरूरत है। हमें नयी सत्ता से पुरानी सत्ता को बदलने की जरूरत है। …और यह हमें अभी करना है।



पुरानी सत्ता चंद लोगों द्वारा नियंत्रित की जाती है, वे ही चंद लोग पूरी सत्ता अपने हाथों में रखते हैं। पुरानी सत्ता का उपयोग करके राजनीतिक पार्टियों ने हमारी आज़ादी और हमारी संपत्ति चुरा ली है।



नयी सत्ता कई लोगों द्वारा बनाई जाती है, साझा किए जाते हैं, जो सबके लिए खुले हैं और संबंधों पर आधारित हैं। नयी सत्ता को राजनीतिक पार्टियों की जरूरत नहीं होती। सभी को एक साथ जोड़ने के लिए एक तकनीकी मंच की जरूरत है।



नयी सत्ता के साथ हम राजनीतिक पार्टियों को अप्रासंगिक बना सकते हैं।



कैसे? खेल को हमारे पक्ष में बदलने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करके।हमें राजनीतिक कार्यालय के लिए उन लोगों को चुनना है जो धन वापसी को साकार कर सकें।



हम नई सत्ता के केंद्र हैं जो राजनीतिक दलों को भंग कर सकते हैं। हम 70 करोड़ मतदाता हैं जो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं हैं। हम बहुमत में हैं, हर 3 मतदाताओं में से हम 2 हैं।



‘धन वापसी’ को साकार करने के लिए राजनीतिक पार्टियों और उनके दोस्तों के पुराने पॉवर को हराने के लिए हम नए पॉवर और टेक्नोलॉजी का उपयोग कैसे कर सकते हैं इस विषय पर चर्चा मेरे अगले ब्लॉग में करेंगे।



धन वापसी को साकार करने के लिए सिस्टम का ज़िम्मेदार और पारदर्शी होना अति आवश्यक है। राजेश जैन समझा रहे हैं की धन वापसी कि सबसे बड़ी रुकावट को हटाने के लिए हमें क्या करना होगा ताकि धन वापसी धन एक वास्तविकता बन सके।



जय हिंद !



 


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